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रसभरी या चिरपोट के Benefits and Side effects

रसभरी या चिरपोट के Benefits and Side effects 

रसभरी या चिरपोट का वैज्ञानिक नाम - फइसेलिस पेरयूवियाना है। यह समस्त भारत तथा दक्षिण अफ्रीका व यूरोप सहित कई अन्य देशों में पाया जाता है।
रसभरी या चिरपोट के Benefits and Side effects
रसभरी या चिरपोट के Benefits and Side effects 

रसभरी का पौधा वर्षा ऋतु में सारे भारत वर्ष में पाया जाता है ,यह खेत खलिहान व खाली जगह पर स्वतः ही ऊग जाता है ।
यह पौधा 1 से 3 फुट तक ऊँचा फैला हुआ होता है, इसे हल्के हल्के पीले रंग के घंटाकर के पुष्प होते हैं पुष्प के बाद फलियां लगती है और इसके फल के ऊपर एक पतला आवरण होता है और इसके अंदर मटर के दाने के समान बीज होता है जब यह कच्ची अवस्था में होती है तब यह हरे रंग का होता है और पकने पर यह पीले व नारंगी सा हो जाता है।
कुछ इलाकों में रसभरी को चिरपोट व पट्ट पाटनी नाम से भी जाना जाता है जो स्वादिष्ट व खट्टा होता है कुछ लोग इसे मकोय भी कहते हैं।
रसभरी या चिरपोट के Benefits and Side effects
रसभरी के कच्चे फल व पौधा

रसभरी या चिरपोट के Benefits and Side effects
रसभरी का पौधा

रसभरी या चिरपोट के Benefits and Side effects
रसभरी के कच्चे फल

रसभरी का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर होता है, इसमें सभी प्रकार के विटामिन्स मौजूद होते हैं इसके अलावा फॉस्फोरस ,लोहा, आयरन कैल्सियम प्रचुर मात्रा में उपस्थित होते हैं

रसभरी या चिरपोट के Benefits and Side effects 

रसभरी के बेनेफिट्स  रसभरी के बीजों में कैलोरी कम मात्रा में उपस्थित होता है इसके बीजों में अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट  कैरेटिनॉइडस  पोलीफेनॉल्स पाया जाता है जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है। तो चलिए जानते हैं रसभरी के बेनेफिट्स के बारे में -
  • रसभरी गठिया रोग में लाभदायक होता है इसके समस्त पंचांग को बारीक कूट पीसकर चूर्ण बनाकर उसके लेप को लगाने से गठिया रोग में जबरदस्त लाभ होता है।
  • रसभरी के बीजों से बढ़ा हुआ वजन कम हो सकता है, अतः आप अपने वजन कम करना चाहते हैं तो रसभरी का उपयोग कर सकते हैं।
  • रसभरी के सेवन से कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रण में रख सकते हैं और अपने स्वास्थ्य को ओर बेहतर कर सकते हैं रसभरी में उपस्थित ओलिक और लिनोलिक acid हमारे शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है और हिरदय को सुरक्षित रखने में मदद करता है।
  • रसभरी में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट इंसुलिन को सामान्य रखता है जिसके कारण यह डायबिटीज या मधुमेह रोगियों के लिए रामबाण औषधि का काम करता है। 
  • रसभरी के सेवन से मोतियाबिंद हमेशा के लिए दूर भाग जाती है।मतलब यह कि आंखों से संबंधित जितने भी रोग होते हैं उनमें यह अति लाभकारी होता है।
  • रसभरी में उपस्थित विटामिन सी हमारे शरीर के रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है जो हमें रोगों से दूर रखता है अर्थात हमें रोगमुक्त बनाता है । विटामिन सी नीबू संतरा आंवला में भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
  • रसभरी में उपस्थित करोटिनाइड्स और पोलीफेनॉल्स की उपस्थिति के कारण बीपी को कंट्रोल में रखती है।
  • रसभरी में मौजूद फाइबर पाचन शक्ति को मजबूत बनाने में सहायक होता है  और विभिन्न रोगों से बचाता है।

Side Effects (नुकसान)

रसभरी के कच्चे फलों को सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि विषैला हो सकता है और साथ ही जब भी इसके पके फलों का सेवन करें उससे पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श अवश्य ही लें।

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