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त्रिभुवन कीर्ति रस के फायदे

त्रिभुवन कीर्ति रस के फायदे
त्रिभुवन कीर्ति रस - बुखार, स्वास संबंधित समस्याओं, यकृत से जुड़ी समस्याओं के लिए रामबाण आयुर्वेदिक दवा है ।
आप सब जानते ही हैं कि आयुर्वेद में बहुत सारी ऐसी औषधियां हैं,जो त्रिदोष के कारण हुए विकार को दूर करती हैं।
त्रिभुवन कीर्ति रस के फायदे
त्रिभुवन कीर्ति रस के फायदे

त्रिभुवन कीर्ति रस एक ऐसा आयुर्वेदिक दवा है,जो हर प्रकार के वात रोगों में प्रयोग की जाती है किंतु यह हर तरह के बुखार के लिए उत्तम होता है। मुख्य रूप से वात रोग और कफ रोगों में त्रिभुवन कीर्ति रस अत्यंत प्रभावी आयुर्वेदिक दवा है।

त्रिभुवन कीर्ति रस का प्रयोग- 
डेंगू चिकिनगुनिया,वायरल बुखार,प्रतिश्याय,चिकिन पॉक्स, खसरा, कंठ में सूजन आदि रोगों में प्रयोग किया जाता है।

इसके अलावा शुरूआती बुखार में ,जब नाड़ी की गति कम या ज्यादा हो ,सिर में दर्द,कंपकपी ,पीठ पर दर्द, छाती पर दर्द, यहां तक कि पानी पीने पर होने दर्द पर भी इसका प्रयोग किया जाता है।

Contant 
शुद्ध हिंगुल, वत्सनाभ,त्रिकटु, शुद्ध टंकन , पिपली मूल ,तुलसी स्वरस, अदरक स्वरस, धतूरा स्वरस, निर्गुन्डी स्वरस,सोंठ, काली मिर्च, बछनाग आदि आयुर्वेदिक औषधियों को मिलाकर त्रिभुवन कीर्ति रस बनाया गया एक आयुर्वेदिक दवा है।

सेवन मात्रा - त्रिभुवन कीर्ति रस की सेवन मात्रा है - 125 - 250 mg तक ले सकते हैं इसे आप गुनगुने पानी या अदरक स्वरस, निर्गुन्डी स्वरस के साथ सेवन कर सकते हैं।
नोट :- त्रिभुवन कीर्ति रस का सेवन किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही लें।
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