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आयुर्वेद बृहत वात चिंतामणि रस [Vrhat vaat chintaamani ras]

आयुर्वेद बृहत वात चिंतामणि रस [Vrhat vaat chintaamani ras]


आयुर्वेद बृहत वात चिंतामणि रस [Vrhat vaat chintaamani ras]- बृहत वात चिंतामणि रस [Vrhat vaat chintaamani ras]- बृहत वात चिंतामणि रस विभिन्न प्रकार के वातरोग, संधिवात में स्वर्ण युक्त चिंतामणि रस बहुत उपयोगी होता है।

आयुर्वेद बृहत वात चिंतामणि रस (स्वर्ण युक्त) हिर्दय रोग में विशेष रूप से लाभकारी होता है।बढ़ी हुई हिर्दय गति,हिर्दय के दर्द, हिर्दय दुर्बल्यता आदि में आयुर्वेद बृहत वात चिंतामणि रस बहुत ही कारगर सिद्ध होता है।

आयुर्वेद बृहत वात चिंतामणि रस में घटक ओषधी
[Vrhat vaat chintaamani ras] बृहत वात चिंतामणि रस स्वर्ण भस्म, रजत भस्म, अभ्रक भस्म,प्रवाल भस्म,मौक्तिक भस्म, लौह भस्म, रस सिंदूर आदि से मिलाकर बनाया जाता है।

उपयोग


आयुर्वेद बृहत वात चिंतामणि रस पक्षाघात वात,अर्दित, पुराना संधिवात, मस्तिष्क का दर्द,मानस दौर्बल्य, इंद्री दौर्बल्य, हिर्दय शूल,हिर्दय दौर्बल्य, अनियमित हिर्दय गति,रक्तचाप बढ़ना, नाड़ी दोष व दौर्बल्य, तथा मस्तिष्क के विकारों में अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है।

उपलब्धता


आयुर्वेद बृहत वात चिंतामणि रस [Vrhat vaat chintaamani ras] किसी भी आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर में आसानी से मिल जाता है।

मात्रा एवं अनुपान


आयुर्वेद बृहत वात चिंतामणि रस [Vrhat vaat chintaamani ras] को एक से दो गोली सुबह और शाम या घी से सेवन करना चाहिए या अर्जुनारिष्ट, महारास्नादि काढ़ा, दशमूलारिष्ट के साथ भी सेवन किया जा सकता है।

आयुर्वेद बृहत वात चिंतामणि रस [Vrhat vaat chintaamani ras] हिर्दय के समस्त विकारों में अत्यंत प्रभावी आयुर्वेदिक दवा है इसके नियमित सेवन से हिर्दय रोगियों को जबरदस्त लाभ मिलता है।

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