आयुर्वेद, ऋतुओं के अनुसार क्या खाएं और क्या नहीं

आयुर्वेद, ऋतुओं के अनुसार क्या खाएं और क्या नहीं

आयुर्वेद, ऋतुओं के अनुसार क्या खायें, और क्या नहीं- ऋतुओं के अनुसार चलने वाले लोग अर्थात ऋतुओं के हिसाब से
अपने जीवन में आहार, विहार का पालन करते हैं,ऐसे लोग हमेशा खुश रहते हैं|
और सबसे बड़ी तो यह है कि वे बीमार नहीं होते हैं और न ही बीमार होने का डर होता है,
आयुर्वेद, ऋतुओं के अनुसार क्या खाएं और क्या नहीं

आयुर्वेद, ऋतुओं के अनुसार क्या खाएं और क्या नहीं


अगर आप भी ऋतुओं के हिसाब से अपने खाने में,घूमने में ध्यान देंगे तो आप भी अपने जीवन में बहुत खुश रहेंगे|
तो चलिए आज जान लेते हैं कि किस ऋतू में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं,
 अगर आप जानना चाहते हैं तो कृपया इस आर्टिकल को पूरा पढ़ियेगा|

हेमंत एवं शिशिर ऋतु में

आहार: इस ऋतु में पंचाग्नि तीव्र होने से पुष्टिकारक, शरीर बलवर्धक, आहार काजू, बादाम,अड़द,शक्कर, और दूध से बने पदार्थ च्वनप्राश, आदि का प्रयोग लाभदायक होता है|
विहार: इस ऋतु में योगा, व्यायाम,ऒर ओस की बूंदों पर पैदल चलना,धूप में सेंकना, गुनगुने पानी से नहाना,पंचकर्म क्रिया में सर्वांग स्नेह स्वेदन कराना अति लाभदायक होता है|
क्या न खायें- कटु,तिक्त, कषाय पदार्थों का सेवन न करें|

बसंत ऋतु

आहार- शहद, जौ,गेंहू, आसानी से पचने वाले भोजन, उबला हुआ पानी,अनार का जूस, व शहद मिला हुआ पानी का सेवन  सेवन करना अति लाभदायक होता है|
विहार- इस ऋतु में कफ के दोषों को दूर करने के लिए तीव्र वमन, धूम्रपान, गांडूस क्रिया करना,चंदन,अगरु का, शरीर पर लेप करना बहुत लाभदायक होता है|
क्या न करें,खायें- कफ को बढ़ाने वाले गरिष्ठ व ठंडे पदार्थ, दिन में सोना,घी, तेल व खट्टे पदार्थ का कतई सेवन नही करना चाहिए|

ग्रीष्म ऋतु

आहार- पुराने अनाज, ताजा छाछ,दूध,घी, अँगूर,नारियल का पानी,अशवगंधा पाउडर आदि का सेवन लाभकारी होता है|
विहार- चटपटे,खट्टे नमकीन, व ऊष्ण पदार्थ का त्याग, करना चाहिए|तथा मदिरापान का सेवन भी नहीं करना चाहिए

वर्षा ऋतु

आहार
  • सुबह उठते ही 2 गिलास पानी पीना चाहिए|
  • इसके बाद सौच आदि करके बादाम,छुहारे का सेवन करना चाहिए|
  • जव, मूंग,सोंठ के साथ पकाय गए पदार्थ, रसों का सेवन, कफवात शामक भोजन, करना चाहिए|
  • कम से कम एक साल पुराना चावल ,मूंग दाल खाना चाहिए|
  • एक साल पुराना गेहूँ का प्रयोग करें|
  • सुबह नाश्ते में गेंहू का दलिया पीना चाहिए|
  • अनार,केला,पपीता, सेव, आदि फलों का सेवन करना चाहिए|
  • सुबह बेल,आंवला का मुरब्बा का सेवन करना चाहिए|
  • मूंग दाल के भुने पापड़ का सेवन करना चाहिए|
  • चुकन्दर, कुंदरू सब्जी का अधिक प्रयोग करें|
  • कम मसाला का सेवन करना चाहिए|
विहार- नदी ,कुएं का पानी न पिएं,पानी उबालकर ही पियें|
बरसात के पानी में नही भीगना चाहिए, और न गीले जगह पर घूमना फिरना चाहिए।अधिक समय तक धूप में न रहें।
क्या न करें,खायें-
  • सत्तू चना,मटर,
  • अधिक पैदल चलना, व्यामम,धूप में बैठना,
  • दिन में नहीं सोना,चाहिए|
  • तीखे मसालेदार सब्जी का सेवन न करें|
  • नदी के पानी का सेवन न करें|
  • रात में ज्यादा भोजन न करें|
  • सर्बत, लस्सी, कोल्ड्रिंक्स नहीं पीना चाहिए|

शरद ऋतु

आहार:गर्म दूध, घी, जलेबी,नारियल, शक्कर, गुड़ मिश्री,खीर,और शरीर को ऊर्जा देने वाले पदार्थों का सेवन करना चाहिए|
विहार: गर्म जल में स्नान,पतले वस्त्र, चंदन खस आदि का लेप करना चाहिए|
क्या न खायें: अधिक भोजन,ममदिरापान, दही धूप में घूमना, दिन में सोना वर्जित है|

आयुर्वेद में आहार संबंधी नियम

आयुर्वेद ने आहार के बारे में आठ जरूरी नियम बताए हैं, जो इस प्रकार से हैं-
  1. मनुष्य को अपनी प्रकृति के अनुसार भोजन का सेवन करना चाहिए|जैसे कि जो लोग वात प्रकृति के हैं उन्हें रुक्ष, शीत, आहार का सेवन नहीं करना चाहिए बल्कि गर्म चीजों को अपने भोजन में शामिल करना चाहिए।पित्त प्रकृति वालों को उष्ण, कटु, तीक्ष्ण आहार नहीं करना चाहिए।तथा कफ प्रक्रति वालों को चिकना व शीत आहार का सेवन नहीं करना चाहिए, बल्कि लघु, रुक्ष, उष्ण का सेवन करें और पित्त प्रकृति के शीत, स्निग्ध आहार लेना चाहिए।
  2. व्यक्ति को आवश्यक होने पर ही खाने की सामग्री को तलना भूंजना चाहिए|
  3. एक साथ कई तरह के आहार मिला कर बनाना चाहिए व सेवन करना चाहिए इसे आहार का संयोग कहते हैं। आहार को मिलाने से पोषण कम नहीं होना चाहिए।
  4. पूरा पेट भर के भोजन नहीं करना चाहिए, पेट का एक हिस्सा थोड़ा खाली होना चाहिए जिससे भोजन आसानी से पक जाए।
  5. हर जगह की जलवायु परिवर्तन होता है, अतः ऋतुओं के अनुसार भोजन करने चाहिए।
  6. भोजन करने का वक्त एकदम सही होना चाहिए, रात में सोने से पहले भोजन कम से कम एक घंटा या उससे अधिक पहले खाना चाहिए।
  7. खाने का क्रम निश्चित हो।
  8. उपरोक्त सभी नियमों का पालन होना चाहिए।

भोजन करने से पहले हाथों को अच्छे से सफाई कर लेनी चाहिए, भगवान का स्मरण करने चाहिए, आहार में पथ्य अपथ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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