त्रिभुवन कीर्ति रस के फायदे

त्रिभुवन कीर्ति रस के फायदे
त्रिभुवन कीर्ति रस - बुखार, स्वास संबंधित समस्याओं, यकृत से जुड़ी समस्याओं के लिए रामबाण आयुर्वेदिक दवा है ।
आप सब जानते ही हैं कि आयुर्वेद में बहुत सारी ऐसी औषधियां हैं,जो त्रिदोष के कारण हुए विकार को दूर करती हैं।
त्रिभुवन कीर्ति रस के फायदे
त्रिभुवन कीर्ति रस के फायदे

त्रिभुवन कीर्ति रस एक ऐसा आयुर्वेदिक दवा है,जो हर प्रकार के वात रोगों में प्रयोग की जाती है किंतु यह हर तरह के बुखार के लिए उत्तम होता है। मुख्य रूप से वात रोग और कफ रोगों में त्रिभुवन कीर्ति रस अत्यंत प्रभावी आयुर्वेदिक दवा है।

त्रिभुवन कीर्ति रस का प्रयोग- 
डेंगू चिकिनगुनिया,वायरल बुखार,प्रतिश्याय,चिकिन पॉक्स, खसरा, कंठ में सूजन आदि रोगों में प्रयोग किया जाता है।

इसके अलावा शुरूआती बुखार में ,जब नाड़ी की गति कम या ज्यादा हो ,सिर में दर्द,कंपकपी ,पीठ पर दर्द, छाती पर दर्द, यहां तक कि पानी पीने पर होने दर्द पर भी इसका प्रयोग किया जाता है।

Contant 
शुद्ध हिंगुल, वत्सनाभ,त्रिकटु, शुद्ध टंकन , पिपली मूल ,तुलसी स्वरस, अदरक स्वरस, धतूरा स्वरस, निर्गुन्डी स्वरस,सोंठ, काली मिर्च, बछनाग आदि आयुर्वेदिक औषधियों को मिलाकर त्रिभुवन कीर्ति रस बनाया गया एक आयुर्वेदिक दवा है।

सेवन मात्रा - त्रिभुवन कीर्ति रस की सेवन मात्रा है - 125 - 250 mg तक ले सकते हैं इसे आप गुनगुने पानी या अदरक स्वरस, निर्गुन्डी स्वरस के साथ सेवन कर सकते हैं।
नोट :- त्रिभुवन कीर्ति रस का सेवन किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से ही लें।
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Jatamansi Benefits and Side Effects - जटामांसी औषधि के फायदे और नुकसान

Jatamansi Benefits and Side Effects - जटामांसी औषधि के फायदे और नुकसान :- भारत में जटामांसी नाम का यह प्रसिद्ध आयुर्वेदिक दवा है।जिसका उपयोग सदियों से किया जा रहा है, जड़ी बूटी त्वचा की देखभाल से लेकर  बैक्टिरियल संक्रमण के उपचार विरोधी भड़काऊ ,नींद उत्प्रेण आदि कई फायदे हैं।
Jatamansi Benefits and Side Effects in Hindi - जटामांसी औषधि के फायदे और नुकसान
Jatamansi Benefits and Side Effects in Hindi - जटामांसी औषधि के फायदे और नुकसान

आयुर्वेद में जटामांसी का उपयोग याददाश्त बढ़ाने के लिए विशेष रूप से किया जाता है। जटामांसी में आराम और शांत करने वाले तत्व मौजूद हैं जो इसे विभिन्न आयुर्वेदिक और हर्बल औषधीय उत्पादों के लिए एक प्रभावी और महत्वपूर्ण घटक बनाता है।

जटामांसी एक फूल देने वाली जड़ी बूटी है। जो परिवार वेलेरिया नाय से संबंधित है। जटामांसी पौधे का वैज्ञानिक नाम - NARDOSTACHYS JATAMANSI  है।
जो एक मीटर की ऊंचाई तक बढ़ते हैं इस पौधे के फूल बेल के आकार के और गुलाबी रंग के होते हैं। विभिन्न आयुर्वेदिक हर्बल दवाओं में से एक सामग्री के रूप में जटामांसी मिली होती है।

पुराने समय में पुराने लोग जटामांसी का उपयोग मुख्य रूप से अपने त्वचा संबंधी रोगों के सामग्री उत्पादों में किया करते थे । साथ ही महिला प्रजनन अंगों के स्वास्थ्य और कार्य क्षमता को बनाये रखने के लिए किया करते थे।
वर्तमान स्थिति यह है कि जटामांसी का पौधा विलुप्त की कगार पर है लेकिन अभी भी पर्याप्त मात्रा में आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर में ,जड़ी बूटी व इसके तेल,क्वाथ, चूर्ण आसानी से मिल जाता है।

जटामांसी का पोषण मूल्य

जटामांसी के कई पोषण मूल्य हैं, रासायनों के संयोजन की उपस्थिति से इसके लाभ कई गुना बढ़ जाता है। संघटक सूची में
  •  एक्टिनिडीन 
  • एरीस्टीन
  • कैरोटीन 
  • कैरलीन 
  • क्लारैरेनोल
  • कौमारिन
  • डायथिरोआजुलेंसेस 
  • जटामांसिनिक एसिड
  •  नारडोल
  • नारडोस्टाचोन
  •  वेलेरियनोल
  • वेलेरनॉल
  •  वेलेरोन
  • एलमोल
  •  विरोलिन
  •  एंजेलिन
  •  एंजेलिन
  •  ओरेविना शामिल हैं।

जटामांसी के स्वास्थ्य लाभ

जटामांसी के सबसे बेस्ट स्वास्थ्य लाभ -
त्वचा की देखरेख बढ़ती हुई धूल गंदगी और अशुद्धि हमारे त्वचा पर भारी पड़ रही है नियमित देखभाल और सुरक्षात्मक उपायों को अपनाना न केवल इसके कॉस्मेटिक मूल्य के लिए बल्कि चिकित्सा आवश्यकता के रूप में आवश्यक होता जा रहा है। 
जटामांसी त्वचा की समस्याओं की एक श्रृंखला का समाधान है।  यह फंगल संक्रमण का इलाज कर सकता है जो त्वचा पर टूट सकता है।  जिल्द की सूजन, एक त्वचा की स्थिति जहां त्वचा की खुजली, क्रस्ट बनते हैं और कान के पास स्केलिंग होती है, इस जड़ी बूटी के साथ इलाज किया जा सकता है।  सोरायसिस से पीड़ित लोग भी जटामांसी से लाभ उठा सकते हैं।

बैक्टीरियल संक्रमण को रोकना
 जटामांसी में एक बहुत ही प्रभावी एंटी-बैक्टीरियल गुण होता है।  बैक्टीरिया कई तरह के स्वास्थ्य मुद्दों जैसे हैजा, फूड पॉइजनिंग, सेप्टिक, टेटनस आदि के लिए एक जड़ काज है, जड़ी बूटी न केवल त्वचा पर काम करती है, बल्कि बहुत ही मूल से इसे खत्म करती है।  कट और चोटों पर जटामांसी को लागू करना उन क्षेत्रों में बैक्टीरिया की गतिविधि के कारण होने वाले संक्रमण को रोकने के लिए एक बहुत अच्छा तरीका है।  यह मूत्र पथ और गुर्दे में संक्रमण को ठीक करने में भी प्रभावी है।

गंध को आराम दें

 जटामांसी के तने के हिस्सों से निकाले गए आवश्यक तेल को जमीन के नीचे उगने (प्रकंद) में बहुत सुखदायक और आराम देने वाली गंध होती है।  यह एक व्यक्ति को शांत करने में मदद करता है और नसों को आराम करने देता है।  गंध वैसे भी आपकी इंद्रियों को परेशान नहीं करता है।

रेचक

 कब्ज विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं में प्रकट होता है।  स्वस्थ जीवन को बनाए रखने के लिए एक अच्छा और स्वस्थ मल त्याग होना बेहद जरूरी है।  कब्ज कई कारणों से हो सकता है जैसे अनुचित खान-पान, तनावपूर्ण जीवनशैली, आहार में अचानक बदलाव आदि। कब्ज के इलाज के लिए जटामांसी एक प्रभावी विकल्प है।  यह बाजार में उपलब्ध सिंथेटिक और रासायनिक आधारित जुलाब के विभिन्न रूपों के लिए एक हर्बल विकल्प है।  इन उत्पादों पर जटामांसी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए क्योंकि यह पाचन और उत्सर्जन प्रणाली को प्रभावित किए बिना काम करता है।  सिंथेटिक उत्पाद आंत को सूखने की प्रवृत्ति रखते हैं क्योंकि वे आंत्र आंदोलन को उत्तेजित करते हुए उस पर श्लेष्म अस्तर को धोते हैं।

 नींद लाने वाला
 जटामांसी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एक अच्छा शामक है।  नींद हमें हमारी खोई हुई ऊर्जा वापस पाने में मदद करती है और इसकी कमी का हमारे शरीर के साथ-साथ मन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।  तंत्रिका संबंधी समस्याएं जैसे कि ऐंठन, सिरदर्द, चक्कर और मनोवैज्ञानिक मुद्दे जैसे अनिद्रा, अवसाद, चिंता, और तनाव सभी आपकी नींद को प्रभावित करते हैं।  उचित खुराक में जटामांसी वाली दवाओं के सेवन से इन्हें कम किया जा सकता है।  यह पेट दर्द और बेचैनी जैसी हृदय संबंधी समस्याओं में भी मदद करता है।

 गर्भाशय के लिए अच्छा है

 जटामांसी आपके गर्भाशय के स्वास्थ्य को बनाए रखने में बहुत मदद करती है।  इसमें एंटी-स्पस्मोडिक गुण होते हैं जो मासिक धर्म प्रवाह के दौरान ऐंठन, दर्द और परेशानी को कम करने में मदद करता है।  रजोनिवृत्ति कई महिलाओं के लिए एक शारीरिक और भावनात्मक रूप से पीड़ा का अनुभव हो सकता है।  जबकि कुछ महिलाओं में यह एक निश्चित उम्र के बाद स्वाभाविक रूप से होता है, अन्य को हिस्टेरेक्टॉमी जैसी सर्जरी के बाद मासिक धर्म को रोकना पड़ सकता है।  शरीर में यह परिवर्तन विभिन्न मनोवैज्ञानिक के साथ-साथ शारीरिक समस्याओं के बाद होता है।  जटामांसी रजोनिवृत्ति के बाद के समाधान के रूप में कार्य करती है।  मिजाज, नींद की गड़बड़ी, चक्कर आना, थकान, सिरदर्द, एकाग्रता में कठिनाई जैसे लक्षण इस जड़ी बूटी के साथ इलाज किए जा सकते हैं।

कम रकत चाप

 आधुनिक शहरी समाज उच्च रक्तचाप से ग्रस्त है।  यह एक जीवन शैली विकार है जो आबादी के एक बड़े हिस्से को प्रभावित कर रहा है।  तनावपूर्ण जीवन शैली, अनियमित भोजन की आदतें, नींद की बीमारी, धूम्रपान और प्रदूषण सभी स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव और दिल पर प्रमुख रूप से जोड़ रहे हैं।  जटामांसी रक्तचाप को कम करने में काम के चमत्कार साबित हुए हैं।  यह हृदय की कार्यप्रणाली को अनुकूलित करने और हृदय गति को नियंत्रित करने का काम करता है।  यह लिपिड प्रोफाइल में किसी भी परिवर्तन को रोकने में मदद करता है और आगे हृदय को लाभ पहुंचाता है।  मुख्य रूप से जटामांसी शरीर में रक्त के परिसंचरण को नियंत्रित करती है और इस प्रक्रिया में बाधा डालने वाली किसी भी समस्या से निपटती है।  यह रक्तचाप को नियंत्रित करता है और उच्च रक्तचाप और हाइपोटेंशन दोनों का इलाज करता है।

जटामांसी के उपयोग (स्पाइकेंर्ड)

 जटामांसी का उपयोग मुख्य रूप से स्वास्थ्य समस्याओं की एक विस्तृत श्रृंखला के इलाज के लिए एक औषधीय विकल्प के रूप में किया जाता है।  तंत्रिका, हृदय, त्वचा, पाचन तंत्र से संबंधित समस्याओं का इलाज इस जड़ी बूटी की मदद से किया जा सकता है।  इसका उपयोग बालों को प्राकृतिक रूप से काला करने के लिए किया जा सकता है।  यह बालों को चिकना और चमकदार भी बनाता है।  इसकी शांत गुणवत्ता शरीर और दिमाग को शांत करती है और नींद को प्रेरित करने के लिए अच्छा है।  यह बच्चों में सक्रियता को कम करने में मदद करता है।  जटामांसी का उपयोग इत्र बनाने के लिए भी किया जाता है।

जटामांसी (स्पाइकेनार्ड) के साइड-इफेक्ट्स और एलर्जी

 जटामांसी का अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।  जैसा कि इसमें रेचक गुण हैं, बड़ी मात्रा में खपत ढीली मल का कारण हो सकता है।  खुराक को हमेशा विनियमित किया जाना चाहिए और नुस्खे के अनुसार।  मतली और उल्टी अक्सर जड़ी बूटी और इसके उत्पादों की निर्धारित खुराक से अधिक होने के साथ होती है।  बार-बार पेशाब आना और पेट में ऐंठन भी हो सकती है।  कुछ लोगों को जटामांसी के घटक रसायनों से एलर्जी हो सकती है।  इसके सेवन से पहले जड़ी बूटी की घटक सूची के माध्यम से जाना बेहद महत्वपूर्ण है।  यदि कोई एलर्जीक व्यक्ति कम से कम मात्रा में उत्पाद का सेवन करता है, तो उसे प्रतिक्रिया हो सकती है।  गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को जटामांसी और इससे युक्त उत्पादों के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि यह मासिक धर्म के निर्वहन को प्रेरित करता है।

जटामांसी की खेती (स्पाइकेंर्ड)

 NARDOSTACHYS JATAMANSI शानदार हिमालय का मूल निवासी है।  यह जड़ी बूटी पारंपरिक रूप से त्वचा की देखभाल और गर्भाशय के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए उपयोग की जाती थी।  बाद में इसका कई गुना स्वास्थ्य लाभ खोजा गया और अब इसे आयुर्वेद और यूनानी में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।  जटामांसी मुख्य रूप से कुमाऊँ, पूर्वी और मध्य हिमालय, चीन और भारत, सिक्किम के साथ-साथ नेपाल और भूटान में साझा की गई सीमा का हिस्सा है।

स्वस्थ होशंगाबाद: निरोगी काया अभियान योग प्राणायाम शिविर

स्वस्थ होशंगाबाद: निरोगी काया अभियान योग प्राणायाम शिविर

आज दिनांक 17/10/2019 को निरोगी काया अभियान के अंतर्गत डायबिटीज, हायपर टेंशन, ओरल कैंसर आदि के संबंध में जनजागरूकता एव बचाव हेतु प्रातः 7:00 बजे नेहरू पार्क होशंगाबाद में उचित पोषण आहार एवं योगा शिविर का आयोजन किया गया।

स्वस्थ होशंगाबाद: निरोगी काया अभियान योग प्राणायाम शिविर
स्वस्थ होशंगाबाद: निरोगी काया अभियान योग प्राणायाम शिविर

                          अतः इस अवसर पर आयुष विभाग के समस्त अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित होकर योग किया।
स्वस्थ होशंगाबाद: निरोगी काया अभियान योग प्राणायाम शिविर
नेहरू पार्क होशंगाबाद में योगा करते हुए

स्वस्थ होशंगाबाद: निरोगी काया अभियान योग प्राणायाम शिविर
नेहरू पार्क होशंगाबाद

आयुर्वेदिक चूर्ण दशांगलेप के फायदे

आयुर्वेदिक चूर्ण दशांगलेप के फायदे| Dashang Lape Benefits

आयुर्वेदिक चूर्ण दशांगलेप के फायदे : दशांगलेप चूर्ण एक आयुर्वेदिक औषधि है जो कि सूजन, त्वचा रोग,घाव आदि रोगों के बाहय प्रयोग में काम आता है।

इसका प्रयोग ज्वर, शिरहशूल , व्रण,शरीर में चकत्ते आदि के उपचार में इसे नारियल तेल या सरसों के तेल में पेस्ट बनाकर बाहयरूप से स्थानिक प्रयोग किया जाता है।

वैसे दशांगलेप मुख्य रूप से शोथ व दर्द हरण करने में अत्यंत प्रभावी आयुर्वेदिक दवा है जो किसी भी दर्द हो इसके बाहय प्रयोग से दर्द ठीक हो जाता है।
आयुर्वेदिक चूर्ण दशांगलेप के फायदे
आयुर्वेदिक चूर्ण दशांगलेप के फायदे

दशांगलेप के घटक द्रव

  1. सिरस छाल
  2. मुलेठी
  3. तगर
  4. लाल चंदन
  5. बड़ी इलायची
  6. जटामांसी
  7. हल्दी
  8. दारुहल्दी
  9. कूठ
  10. नेत्र बला
  11. घी
आदि घटक द्रव से मिलकर दशांगलेप बनता है।

दशांगलेप बनाने की विधि

उक्त 11 आयुर्वेदिक दवाओं को अच्छी तरह समान मात्रा में लेकर कूट पीसकर एकदम बारीक चूर्ण बना लें ततपश्चात उसे अच्छे से छान लें और जो टुकड़े बचेंगे उन्हें छोड़ दें और छानने के बाद जो चूर्ण निकला है उसे किसी कांच की बर्तन पर सुरक्षित रख दें यानी आपका दशांगलेप बनकर तैयार हो चुका है।

दशांगलेप को लेप करने की विधि

सबसे पहले तो आप आवश्यकता के अनुसार किसी बर्तन पर  दशांगलेप लेना है जैसे 1 या 2 चम्मच ,अब आपको आधी चम्मच उसमें हल्दी पाउडर और 1 या 1/2 चम्मच सरसों का तेल हल्का गुनगुना करने के बाद मिला देना और उसे अच्छे से मिक्स कर लें जो पेस्ट तैयार हो जाता है। अब उस पेस्ट को जहाँ पर दर्द हो रहा है वहां पर लगा लें आपको निश्चित तौर पर आराम मिलेगा।

दशांगलेप के फायदे और नुकसान

  • शरीर के किसी भी हिस्से में शोथ या सूजन हो वहां पर लगाने से आराम मिलता है।
  • घाव या व्रण व छोटे छोटे चकत्ते को ठीक करने में दशांगलेप लाभकारी होता है।
  • ज्वर के साथ साथ शिरहशूल या सिर का दर्द हो तब आप दशांगलेप को माथे पर कपड़े के सहायता से लेप कर सकते निश्चित ही लाभ मिलता है।
नुकसान-
  1. इसे अधिक समय तक शरीर मे लेप करके न रखें अन्यथा उस स्थान पर जलन हो सकता है।
  2. दशांगलेप को धूप वाले स्थान पर न रखें बल्कि इसे ठंडे स्थान और शांत जगह पर रखें।
  3. बच्चों से दूर रखे।
नोट :- यह आयुर्वेदिक दवा सिर्फ और सिर्फ बाहरी प्रयोग के लिये ही है।इसे आप डॉक्टर की देखरेख में ही प्रयोग करें।

यह आयुर्वेदिक दवा दशांगलेप किसी भी आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर में बहुत आसानी से उपलब्ध है।अगर आप इसे किसी कारण से  बना नहीं पा रहे हैं तो आप खरीद सकते हैं।


वजन घटाने: क्या नींबू पानी वास्तव में वजन कम करने में मदद कर सकता है

वजन घटाने: क्या नींबू पानी वास्तव में वजन कम करने में मदद कर सकता है? 


आप में से कितने लोग जानते हैं जो सुबह उठते ही सबसे पहले नींबू पानी पीते हैं, ठीक है? हमें यकीन है कि कई हैं। लेकिन वे ऐसा क्यों करते हैं?

क्योंकि नींबू पानी को खाली पेट लेने के बारे में हमेशा से काफी चर्चा रही है, यह आपको वजन कम करने में मदद करता है। लेकिन क्या यह वास्तव में सच है?


विशेषज्ञों का कहना है कि इसे सीधे लगाने के लिए, पानी में निचोड़ा हुआ ताजा नींबू किसी भी वास्तविक वजन घटाने का कारण नहीं बन सकता है। लेकिन अगर आप अन्य कैलोरी से भरपूर दूधिया पेय या फलों के रस को बदलने के लिए इस नहीं-स्वादिष्ट पेय का उपयोग कर रहे हैं, तो इससे आपको वजन कम करने के लिए आवश्यक कैलोरी की कमी पैदा करने में मदद मिल सकती है।

अपने आप को हाइड्रेटेड रखना वजन कम करने का एक और महत्वपूर्ण घटक है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारा शरीर कभी-कभी भूख के रूप में प्यास की व्याख्या करता है और इस प्रकार हम कैलोरी की आवश्यक मात्रा से अधिक खा लेते हैं। और निम्बू पानी आपको सुपर हाइड्रेट रखता है।

नींबू पानी वास्तव में फूला हुआ पेट कम करने में मदद कर सकता है क्योंकि यह एक हल्के मूत्रवर्धक की तरह काम करता है। लेकिन अगर आप लंबे समय से सूजन का सामना कर रहे हैं, तो नींबू पानी मदद नहीं कर सकता है।

कोई भी पेय जादुई रूप से आपको वजन कम करने और पतला होने में मदद नहीं कर सकता है। स्वस्थ और स्थायी तरीके से वजन कम करने के लिए आपको अच्छी तरह से खाने और सक्रिय होने की आवश्यकता है।

नींबू प्रकृति में साइट्रस/अम्लीय है, इसलिए, यदि आप कुछ स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों जैसे जीईआरडी या नाराज़गी के कारण अम्लीय खाद्य पदार्थों से परहेज कर रहे हैं, तो अपने पानी के गिलास में नींबू का उपयोग न करें।

आयुर्वेद के जन्मदाता भगवान धन्वंतरि

आयुर्वेद के जन्मदाता भगवान धन्वंतरि

आयुर्वेद के जन्मदाता भगवान धन्वंतरि - कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस के त्यौहार मनाया जाता। धनतेरस दिपावली के दो दिन पहले मनाया जाता है।
धनतेरस के दिन सभी लोग कपड़े और आभूषणों की खरीदी करते हैं जिसे शुभ माना जाता  है।

कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदसी को भगवान धनवन्तरि का जन्म हुआ था। संसार के जीवों को रोग मुक्त करने के लिए भगवान धनवन्तरि आगे बढे।
आयुर्वेद के जन्मदाता भगवान धन्वंतरि
आयुर्वेद के जन्मदाता भगवान धन्वंतरि


भारतीय पौराणिक दृष्टि से धनतेरस को स्वास्थ का देवता का दिवस माना जाता है। भगवान धन्वंतरि आरोग्य,   सेहत ,  आयु   और तेज के आराध्य देवता हैं । भगवान धन्वंतरि से आज के दिन प्रार्थना की जाती है कि वे समस्त संसार को निरोग कर मानव समाज को दीर्घायु प्रदान करें। 

भगवान धन्वंतरि की पूजा घर में सुख शांति के लिए करते हैं

धन्वंतरि भगवान की पूजा लोग इसलिए करते हैं कि घर में सुख शान्ति व संमृद्धि के लिए सबसे पहले जरूरी है हमारा स्वास्थ्य जब हमारा स्वास्थ्य अच्छा रहेगा तो धन दौलत की कमी नई होगी अतः लोग आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं,जिससे कि हमारा स्वास्थ्य अच्छा हो।

एशा कहा जाता है कि धनतेरस के दिन जो नए वस्तु, स्वर्ण आभूषण आदि खरीद कर पूजा करेगा उसको कभी धन सम्पदा की कमी नही रहेगी।
भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद के प्रवर्तक माने जाते हैं इसलिए धनतेरस त्रियोदशी शरीर को स्वस्थ्य रखने की प्रेरणा देती है

धनतेरस के दिन क्या? खरीदना चाहिए

हमारे देश में दीपावली पर्व  बहुत ही धूमधाम व हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस साल धनतेरस का त्यौहार पांच नवम्बर को मनाया जाएगा और इस दिन कुछ वस्तु या सामग्री खरीदना बहुत ही शुभ होता है।

आज हम आपको ऐसी चीजें के बारे में बताएंगे जिसे धनतेरस के दिन जरूर खरीदनी चाहिए।

ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति धनतेरस के दिन खरीदी करते हैं उन लोगों के पास धन की कमी नहीं होता है।

तो आइए जानते हैं धनतेरस के दिन क्या क्या खरीदी करना चाहिए

प्रायः ज्यादातर लोग सोना चांदी खरीदते हैं और यह शुभ होता भी है और धनतेरस के दिन खरीदना शुभ होता है

यदि आप सोना चांदी नई खरीद पा रहे हैं तो कम से कम कुछ छोटे छोटे चीजें खरीद लो जैसे धनिया धनतेरस के दिन
धनिया खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है हमारे पूर्वजों ने भी इसे अत्यंत शुभ माना है और उनकी ऐसी मान्यता है कि इस दिन धनिया खरीदने से घर में सुख शान्ति व समृद्धि आती है,

इस दिन खरीदे हुए धनिया को पूजा करके थोड़ा सा बगीचे में बो दें और थोड़ा सा अपने घर में रख लें जिससे पूरे साल  धन की कमी नहीं होगी।

इसके अलावा महिलाएं अपने सिंगार का सामान व लाल साड़ी भी खरीद सकते हैं ये भी धनतेरस के दिन खरीदने से अत्यंत शुभ होता है।

इस दिन एलुमिनियम और कांच के बर्तन नहीं खरीदना चाहिए, ऐसा माना जाता है कि इन चीजों में राहु का वास होता है,जोकि शुभ नहीं होता।

टंकण भस्म | Tankan bhasm

टंकण भस्म ( Tankan bhasm)

टंकण भस्म - टंकण भस्म एक आयुर्वेदिक दवा है।इसे सुहागा या बोरेक्स के नाम से भी जाना जाता है,जो कि बोरेक्स पाउडर से तैयार किया जाता है।
आयुर्वेद में टंकन भस्म का उपयोग खांसी, सांस लेने में समस्या,घबराहट, ब्रोंकाइटिस, पेट में दर्द, कष्टार्तव ,रूसी, सांस की बदबू, व मूत्र संबंधी आदि रोगों में लाभदायक सिद्ध होता है।
टंकण भस्म | Tankan Bhasm

टंकण भस्म | Tankan Bhasm

वैसे टंकन भस्म को कई सारी कंपनियां बनाती हैं
जैसे - विंध्य हर्बल, वैधनाथ

टंकन भस्म के लाभ और औषधीय उपयोग

टंकन भस्म को मुख्य रूप से स्वास संबंधित बीमारियों में दी जाती है। जैसे-
  • अत्यधिक बलगम आता हो जो सफेद गाढ़ा या पीले रंग का होता है।
  • घबराहट के साथ साथ खांसी को ठीक करता है।
  • अधिक बलगम के कारण सीने में जलन होता है,उसमें लाभदायक होता है।
नोट- यह गले में जलन और लगातार सुखी खांसी वाले मरीज को नहीं दी जानी चाहिए।

  • टंकण भस्म गाढ़ा बलगम को पिघलाता है,ओर फेफड़ों से वलगम को बाहर निकालने में मदद करता है।
  • टंकण भस्म को सितोपलादि चूर्ण के साथ सेवन करने से ब्रोंकाइटिस में लाभ होता है। हालांकि ब्रोंकाइटिस में इसका प्रयोग तब किया जाता है  जब वलगम गाढ़ा होता है और इसे बाहर निकालना कठिन होता है।
  •  टंकन भस्म का उपयोग कष्टार्तव का इलाज किया जा सकता है ,लेकिन आमतौर पर इसका इलाज कष्टार्तव के लिए नहीं किया जाता है ।लेकिन मासिक धर्म के रक्त में भारी थक्के मौजूद होने पर फायदेमंद हो सकता है। टंकण भस्म के साथ अशोक क्वाथ या काढ़ा, और साथ में चंद्रप्रभावटी का सेवन करने चाहिए। और जो माताएं प्रेग्नेंसी की स्थिति में है उन्हें कतई इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • टंकन भस्म को नारियल तेल में मिलाकर बालों की जड़ों तक लगाने से रूसी को ठीक करने में मदद करता है। 
इस्तेमाल करने की विधि
आधा चम्मच टंकन भस्म लें और उसमें नारियल तेल डालें कि वह पेस्ट बन जाये और फिर इसे स्कैल्प पर 5 से 6 मिनिट उंगलियों से मसाज करें और आधे घंटे तक छोड़ दें उसके बाद शैम्पू से बालों को धूल लें।और आप चाहे तो उस पेस्ट में नीम तेल या पत्तियों के पाउडर को भी मिला सकते हैं जो बालों के लिए अधिक फायदेमंद होता है।

टंकण भस्म सेवन विधि-

टंकण भस्म को 125 से 250 mg तक या एक टैबलेट के बराबर शहद के साथ लेना चाहिए।
निर्देश: चिकित्सक के परामर्शानुसार सेवन करें 



World Heart Day: दिल को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आयुर्वेदिक टिप्स

World Heart Day: दिल को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आयुर्वेदिक टिप्स

World Heart Day: दिल को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आयुर्वेदिक टिप्स: आज कल हार्ट की जो समस्या पैदा हो रही हैं उसका मूल कारण है हमारा लाइफस्टाइल ओर हमारा खान- पान.

हमारी लाइफ बहुत सारी स्ट्रेस या तनाव से भरी हुई है तथा हम अपने भोजन में बहुत सारे ऐसे जंक फूड का सेवन निरंतर कर रहे हैं ,जिसका परिणाम स्वरूप इसका असर हमारे हार्ट में डायरेक्टली पड़ता है।

 हार्ट के लिए खान पान पर ध्यान देना बहुत ही आवश्यक है

कई बड़े बड़े डॉक्टरों का मानना है कि सबसे पहले हमें अपने भोजन यानि खान पान में विशेष ध्यान देना होगा, जिससे हमारा दिल स्वस्थ रह सके।
इसके लिए हमें शुद्ध भोजन करना होगा और वो भी जंक फूड रहित, तभी हम अपने दिल को स्वस्थ रखने में कामयाब हो पाएंगे।
उदाहरण के लिए- 

फ्राई वाली चीजें, बहुत ज्यादा तीखी चीजें,मिठाइयां, मिल्क प्रोडक्ट,नॉनवेज आदि को कम मात्रा में सेवन करना चाहिए। अपने खान पान में हरी सब्जियां और ताजे फलों को शामिल करना चाहिए।
World Heart Day: दिल को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आयुर्वेदिक टिप्स
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 हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए हैल्दी लाइफस्टाइल

यदि आप वाकई में अपने हार्ट को हैल्दी रखना चाहते हैं तो आप को रोज सुबह कम से कम एक घंटा फिजिकल एक्टिविटीज करना चाहिए जैसे व्यायाम, योगा,हल्का फुल्का दौड़ व टहलना आपके हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए बहुत जरूरी होता है।

दिल को फिट रखने के लिए आयुर्वेदिक दवा

1. अर्जुन या कहवा की छाल
हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए अर्जुन की छाल आयुर्वेद की सुप्रसिद्ध आयुर्वेदिक दवा है। इसके छाल को काढ़ा बनाकर पीने से दिल में शक्ति का संचार है, तथा साथ हार्ट से संबंधित अन्य बीमारियों को दूर करता है।
2. लहसुन की कली
लहसुन की एक कच्ची कली हर रोज प्रातः खाली पेट खाने से कोलेस्ट्रॉल व बीपी में लाभ होता है।
यदि आप दिल को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो आप इन उपायों को जरुर करें, निश्चित ही आपको फायदा मिलेगा। इसके अतिरिक्त आप अपने आप मे दुःखी न हों क्योंकि यह भी हार्ट को नुकसान पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है,अतः हमेशा खुश रहें।